Best short stories in hindi with moral for kids and perents

Best short stories in hindi with moral for kids and parents

Today I have brought short stories for you which are in हिन्दी , before that you must have read about a Motivational short story which was a story of a poor boy but today's topic is different, so let's start.


Today we are posting Best short stories in hindi with moral for kids. these stories are only for kids also written in that lucid language. this hindi stories with moral may also be useful for parents.


We are posting 3 best short stories in hindi with moral for chidren and parents. In all short stories, the major cause is the corona virus which is good for someone and bad for someone.


 1.समय 

(Best short stories in hindi with moral for kids)


Short Story in hindi writter... Shobha Rani Goyal

कोरोना वाइरस के चलते Lockdown कामकाजियों के लिए किसी क़ैद से कम नहीं है । लेकिन किसी के लिए यह यादगार जश्न का मौका है । जिसे समय और साथ मिला , वो खुश होगा ही ।

रसोई का काम निपटा कर रिद्धिमा पति और पाँच वर्षीय बेटी रुही के साथ कैरम खेलने लगी । टीवी पर कोरोना से संबन्धित न्यूज़ चल रही थी । 

दिनों दिन बढ़ते कोरोना पॉज़िटिव केसेस से व्यथित होकर रिद्धिमा के मुह से निकाल गया- 'न जाने कब कोरोना खत्म होगा और कब लॉकडाउन खुलेगा।'

कभी न खुले lockdown और कोरोना वाइरस भी ना जाए' रुही ने कहा । रुही की बात सुनकर पत्प पत्नी दोनों चौंक पड़े । 'ऐसा क्यो मेरे बच्चे ?' अमन ने पूछा ।

'क्योंकि इस कोरोना वायरस के कारण lockdown हुआ और आप दोनों ऑफिस नहीं जा रहे हो और आया आंटी की छुट्टी चल रही है । कोरोना वायरस के खत्म होने पर lockdown खुल जाएगा और आप दोनों ऑफिस चले जाओगे, शाम को देर से आओगे और मुझे आया आंटी के साथ रहेना पड़ेगा ।

आप दोनों थक जाते हो, ठीक से बात नहीं करते मेरे साथ खेलते भी नहीं । मुझे आया आंटी के साथ नहीं आप दोनों के साथ रहना है ।'

रिद्धिमा और अमन अवाक रह गए । उन्होने इस तरह कभी सोचा ही नहीं । Lockdown से जीवन में ब्रेक लगने के कारण ही परिवार का साथ, उसकी अहमियत पता चली ।

 अब रिश्तो के धागों को मजबूत बनाने के उपाय सोचने की जरूरत है । Lockdown के बाद रुही के मन का ध्यान रखने रखने के बारे में रिद्धिमा और अमन दोनों दोनों विचार कर रहे थे ।

निष्कर्ष: इस भागदौड़ बारी जिंदगी में अपने बच्चो की खुशियों का भी ख्याल रखे ।



Best short stories in hindi with moral for kids and perents

2.सम्मान


(Best short stories in hindi with moral for kids)


Short story in hindi writter... Dipesh Jain


कोरोना काल ने सच्चे कर्मवीरों को सामने ला दिया। ये चौथा मोहला था जहां से कचरा इकट्ठा करना था । कचरा गाड़ी चलाते हुए आज उनका मन कुछ ज्यादा ही व्यथित हो रहा था। एक तो कोरोना की मुसीबत, दूसरी तरफ से ये काम ।

'मन हो रहा है की आज ही यह काम छोड़ दूं , हमारी परवाह किसे है !' ऐसा सोचते, गाड़ी चलाते हुए वो अगले मोहल्ले में दाखिल हुए । गाड़ी से कचरा बाहर लाने और कोरोना से सावधान रहने की सूचना प्रसारित हो रही थी ।

इनके बीच वो अपने ही ध्यान में मग्न गाड़ी चलाते हुए मोहल्ले के बीच बने पार्क तक पहुँच गए । देखा तो लोग बालकनी में खड़े थे । तभी अचानक गाड़ी पर फूल बरसने लगे। वो हैरान से बाहर निकले, तो पुष्पवर्षा और तेज हो गई । 

अचानक तालियों का शोर शुरू हो गया। वो हतप्रभ से चारों तरफ देखने लगे। सबकी नजर उन पर ही थी और सब लोग मुस्कुराकर अपने ही घर में रहकर उनका अभीवादन अपने अंदाज में कर रहे थे । 

उस समय उन्हें किसी सम्राट-सा महसूस हो रहा था। इतने साल की नौकरी में कभी किसी ने पानी को नहीं पूछा और आज पूरा मोहल्ला फूलो की बरसात कर रहा है। वे शब्दविहीन हो चरो तरफ घूम-घूमकर सबको देखने लगे।

इसी बीच मास्क और दस्ताने पहने सोसायटी के प्रमुख कचरा गाड़ी के पास पहुंचे और उन्हे मास्क और दस्तानों का जोड़ा भेंट किया ।

इसके बाद फूल माला पहनाई और शौल ओढ़ाते हुए अध्यक्ष ने उनसे कृतज्ञ भाव से कहा 'इन हालात में जब हम घर का मेनगेट पार नहीं कर पा रहे है, आप इतने मोहल्लों से कचरा इकट्ठा कर हम लोगों पर बड़ा उपकार कर रहे है ।

ऐसे में ये छोटी सी सम्मान राशि हमारी और से।' उनकी आंखो में चंद लम्हे पहले की उदासी निराशा और खीझ गायब हो गई थी । अब मुख पर मानव सेवा का असीम सुख नजर आ रहा था ।

ऐसा सम्मान पाकर उनकी आंखे छलक उठी । प्रत्युतर में हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया और भरोसा दिलाया की हमारा आपका संबंध यूं ही बना रहेगा।


निष्कर्ष: हमेशा लोगों की मदद करनी चाहिए जिससे उन्हे खुशी मिलती है आपको पुण्य ।



3.मास्क 

Short Story In Hindi Writter... Piyush Kumar Ojha

समाज में फैले एक लाइलाज रोग से बचाव के लिए वो मास्क लगाती आयी थी, लेकिन आज एक नया मास्क लगाकर उस पुराने रोग से थोड़े दिनो की आजादी भी उसे भली मालूम हो रही थी... 

पिछले  28 दिनो से श्यामली खुद को बहुत निश्चिंत और आजाद महसूस कर रही थी, एकदम सुरक्षित। 

 उसका पति ड्राईवर था, बहुत प्यार करता था श्यामली से, 15 साल पहले एक एक्सीडेंट में चल बसा और उसके साथ ही श्यामली के जीवन की सारी खुशियाँ भी चली गई । 

बीमार माँ, दो महीने का खोली का बकाया किराया और तीन माह की दूध पीती बच्ची विरासत में छोड़ कर गया था उसके लिए। 

19 साल की हो तो थी वह तब । उसके सारे अरमान और ज़िंदगी के रंग धीरे-धीरे उसके शादी के जोड़े के साथ घर के एकमात्र सन्दूक में बंद होते गए । 

कुछ समय लगा उसे अपने आप को सम्हालने में, माँ बाबा ने कहा उससे दूसरी शादी कर ले लेकिन अपनी गोद में मौजूद पति की छवि से नजर नहीं हटा सकी वह । 

दिन में लोगो के घरो में काम करके और वहाँ से आकर घर पर छोटी-मोटी सिलाई का काम करके वह अपना घर चला रही थी। बेटे के गम में सास भी ज्यादा न जी सकी और फिर तो बस श्यामली के लिए उसकी बेटी की छवि  ही उसकी दुनिया बन गयी । 

लेकिन पति के बगैर अकेले बाहर निकलने पर उसे पता चला कि बाहर कि दुनिया उसकी बेटी कि तरह मासूम और निश्छ्ल नहीं है । अपने अंदर कि औरत को उसने अपने पहनावे और जबान कि तल्खी से ढंक कर रहना सीखा।

मगर फिर भी जब भी बाहर निकलती तो ऐसा लगता कदम-कदम पर भूखी निगाहे उसके शरीर को भेद कर उसकी आत्मा को मलिन कर रही हों। 
बार-बार मदद करने या किसी भी बहाने से उसको छूने कि निर्लज्ज कोशिश हो । 

हर दिन घर से निकलती तो डर और असुरक्षा का एक अज्ञात मास्क लगा हुआ महसूस करती अपने ऊपर । और पिछले तीन-चार से तो बेटी के बड़े होने के साथ उसकी चिंता दुगुनी हो गई थी। 

मगर पिछले दिनों जब नई विदेशी बीमारी से बचने के लिए सरकारी लोगों ने सब कुछ बंद करने का हुक्म दिया है, श्यामली को बाहर जाकर दूध, पानी, राशन लाते समय कुछ निश्चिंतता लगने लगी है। 

वो घूरती निगाहें, अनचाहे छूने कि कोशिश करते हाथ, अश्लील इशारे, फब्तियाँ करते चहरे सब जैसे गायब हो गए हों इस धरती से । 

15 साल बाद अपनी आत्मा पर लगा मास्क हटा कर बाहर निकल रही थी श्यामली। मुह पर लगे कपड़े के मास्क को छु कर मन ही मन मुस्करा कर खुद से ही बोली 'कुछ मास्क अच्छे होते है । 

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